इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन रिसर्च ने किया नया खुलासा

अटलांटिक महासागर में एक ऐसी ईल रहती है जो अपनी यादों को बनाए रखने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करती है। तो वहीँ नॉर्वे के इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन रिसर्च के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है जिसमे वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोपीय ग्लास ईल में मनुष्यों जैसी भावनाएं होती हैं। वे चुंबकत्व को महसूस कर सकती हैं साथ ही इसकी सहायता से वे भौतिक रूप से अपने लिए पहचान बना सकती हैं।

आगे शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज पहला सबूत है कि मछली की किसी भी प्रजाति में आंतरिक चुंबकीय कंपास होता है, जिससे वह जलधारा की दिशा को याद कर सकती है। वहीँ नेविगेशन क्षमताओं की जांच के लिए टीम नॉर्वे के जंगली इलाके से 200 ईलों को प्रयोगशाला ले गई है। उन्हें एक टैंक में रखा और जलधारा की दिशा में हेरफेर किया जिसमे उन्होंने देखा कि इससे मछलियां प्रभावित नहीं हुईं। उन्होंने अपनी स्मृति और भावनाएं बनाएं रखीं। वहीँ उन्हें उत्तर दिशा की पहचान थी।

बता दे ईल का जहां जन्म होता है, वे वहीं आकर मरती हैं। सूत्रों के मुताबिक, यूरोपीयन ईल एक ऐसी प्रजाति है जो अपने जीवनकाल में दो बार अटलांटिक महासागर को पार करती है।

POSTED BY : KRITIKA

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